एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इलेक्टोरल बॉन्ड को एक सक्सेस स्टोरी या कामयाबी की कहानी बताया है. पीएम मोदी ने कहा कि चुनावी फंडिंग में पारदर्शिता लाने के लिए रास्ते खोजते हुए इलेक्टोरल बॉन्ड के रूप में उन्हें एक 'छोटा सा रास्ता मिला.' लेकिन क्या वाक़ई ऐसा है.
सोमवार को समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इलेक्टोरल बॉन्ड को एक सक्सेस स्टोरी या कामयाबी की कहानी बताया. साथ ही ये भी कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड होने की वजह से आज एक मनी ट्रेल उपलब्ध है और ये पता चल पा रहा है कि किसने कितना पैसा किस पार्टी को दिया.
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मतदान केंद्र की गोपनीयता को राजनीतिक दलों की फंडिंग की गुमनामी तक नहीं बढ़ाया जा सकता है.एएनआई की संपादक स्मिता प्रकाश ने पीएम मोदी से पूछा कि क्या इलेक्टोरल बॉन्ड्स का फैसला गलत था? "अब उसमें अच्छा हुआ, बुरा हुआ वो विवाद का विषय हो सकता है... इसकी चर्चा हो. मुझे जो चिंता है...मैं ये कभी नहीं कहता हूँ कि निर्णय में कुछ कमी नहीं होती है. निर्णय को... चर्चा कर सीखते हैं, सुधारते हैं. इसमें भी सुधार के लिए बहुत सम्भावनाएं हैं. लेकिन आज पूरी तरह काले धन की तरफ देश को धकेल दिया है. और इसीलिए मैं कहता हूँ... सब लोग पछतायेंगे... जब बाद में ईमानदारी से सोचेंगे... सब लोग पछतायेंगे.
भारतीय रिजर्व बैंक ने बार-बार चेतावनी दी थी कि इलेक्टोरल बॉन्ड का इस्तेमाल काले धन के प्रसार, मनी लॉन्ड्रिंग, और सीमा-पार जालसाज़ी को बढ़ाने के लिए हो सकता है. भारद्वाज कहती हैं, "आरबीआई और इलेक्शन कमीशन ने चेतावनी दी थी और बार-बार मना किया था कि आप इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को मत लाइए. उसके बावजूद इस स्कीम को लाया गया और फिर सुप्रीम कोर्ट में भी इन सब चीज़ों पर चर्चा हुई. और अब जब ये सूचना निकल कर आ रही है तो वो यही ट्रेंड्स दिखा रही है कि कैसे संभावित शेल कम्पनियाँ बीजेपी को और अन्य राजनीतिक दलों को भी पैसे दे रही हैं. और घाटे में चल रही कम्पनियाँ बड़ी मात्रा में पैसे दे रही हैं तो वो कैसे हो रहा है.
उन्होंने कहा, "इलेक्टोरल बॉन्ड एक सफलता की कहानी इस तरह है कि सर्वोच्च न्यायालय ने इसे सार्वजनिक कर दिया है. अब जनता को पता चल गया है कि क्या हुआ, किसने दिया, किसको दिया, किस वक़्त दिया. इसके मायने ये हैं कि एक तरह से पीएम सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत कर रहे हैं."अंजलि भारद्वाज कहती हैं कि ये बड़ी विडम्बना है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस योजना को ख़ारिज ही इसीलिए किया क्योंकि इसमें पारदर्शिता ही नहीं थी और ये लोगों के जानने के अधिकार और उनकी अभिव्यक्ति और बोलने के अधिकार का उल्लंघन करता है.
इन पैटर्न्स के मुताबिक़ कई निजी कंपनियों पर ईडी, सीबीआई या इनकम टैक्स विभाग की कार्रवाइयां हुईं और उसके बाद उन्होंने बीजेपी को करोड़ों रुपए के इलेक्टोरल बॉन्ड चंदे में दिए.
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